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दिव्य दीपावली

लेखक : आचार्य अभयदेव विद्यालंकार जी ( श्रीअरविन्द निकेतन, चरथावल ) ध्रुवं ज्योतिर्निहितं दृशये कं -ऋग्वेद ६/९/५(एक नित्य ज्योति है जो कि देखने के लिये अन्दर रखी गयी है) दीपावली आयी। प्रतीक्षा करते हुए और उत्सुक बच्चे (दिन में ही तेल बत्ती से तैय्यार किये)… Read More »दिव्य दीपावली